वो शाम कुछ अजीब थी...


            मैनें उसके घर से थोडा दूर कार रोककर उसे कॉल किया। 'कितनी देर और?' वो,"2मिनिटं रुको मैं आई!' पाच मिनिट बाद मॅडम आ गये। मुझे गुस्सा आ रहा था। पर उसे देखकर मैं अपना पुरा गुस्सा भूल गया। बस उसे देखता ही रहा वो कब कर में आकर बैठ गयी पता ही नहीं चला। उस लाल रंग की साडी में किसी परी जैसी दिख रही थी। उसने अपने बालोंको उपर बांध दिया था। बस एक लट हवा के झोके के साथ उसके गालों को छेड रही थी। तभी वो बोली,'चले जनाब!' मैनें बस गर्दन हिलाई और कार वहाँ से निकाली। पुरा शादी का function मैनें उसे देखने में गुजार दिया। फिर हम शादी से निकले तो आधे रास्ते आते ही मैनें कहा,'uncle को कॉल करके बोल दो तुम यही शादीवाले घर रुक रही हो। वो मुझे देखने लगी। मैं,'अरे, नहीं मुझे तुम्हारे साथ रात भर बातें करनी हैं। रात भर तुम्हे अपनी आँखों में समाना हैं। बाकी कुछ नहीं.!' और ओ चेहरे पर एक मुस्कान के साथ कार से बाहर देखने लगी।
        घर आने के बाद वो बोली,' पहले बताया होता तो अच्छा रहता!'
मैनें कहा, "क्या बताता?"
वो,"कम से कम मैं एक ड्रेस तो लाती साथ में। साडी में कितना uncomfortable हो रहा हैं।"
मैं," सॉरी।"
वो, "चलो हटो! मुझे कुर्ता दो अपना।" और उसने कपाट  खोलवर मेरा एक कुर्ता लिया और मुझसे कहाँ,"जनाब क्या आप थोडी देर इस कक्ष से प्रस्तान करोगे।"
मैनें सिर्फ गर्दन हिलाई और बेडरूम से बाहर आ गया। पुरे आधे घंटे के बाद उसने रूम का दरवाजा खोला। उसने मेरा सफेद कुर्ता पहेना था। उसके गेहूंये रंग पर वो सफेद कुर्ता। आहह आह..!!😊 फिर खुद को सांभाळते हुये मैनें एक नटखट सी मुस्कान के साथ कहाँ," तुमको अगर मेरी खुशबू महसुस करनी थी। तो direct बोल देती। मैं मना नहीं करता।"
वो," तुम्हे सच में लगता हैं? मैनें ये तुम्हे महसुस करने के लिये किया हैं। तो तुम गलत हो, क्युकीं तुम्हे महसुस करने के लिये मैं ऐसा करुंगी।(और उसने कस के मुझे गले लगाया) देखा इसे कहते हैं महसुस करना।"
मैनें भी थोडा मूड में आकर कहाँ," पर मुझे तो महसुस नहीं हुआ।"तबी वो अपने लबो को मेरे लबो के पास लाकर बोली,"अब?"
मैनें सिर्फ गर्दन से नहीं बोला। अब उसका नाक मेरे नाक के इतने करीब था। की मुझे अब उसके सांसे महसुस होणे लगी। मेरे नहीं कहते ही उसने लबो को लबो पर रख दिया। पहले तो मैनें आँखे बडी कर दी। क्युकीं मेरे लिये ये अचानक था। कुछ पल बाद मैनें उसे side कर दिया। वो "क्या हुआ? अच्छा नहीं लगा?"
मैं,"देखो मुझे कैसा लगा बात वो नहीं हैं। मैं चाहता हूँ जब में तुम्हारे करीब आऊ तो पुरे हक से। मैं नहीं चाहता की दुसरे दिन एकदुसरे से नजरे चुरानी पडे।"
मैनें पिछे मुडकर देखा तो उसके हाथ में दिया था। उसने दिये को टेबल पर रखा और बोली,"that's why I Love You.!" उसने मेरा हाथ पकडके मुझसे कहाँ," मुझे नहीं पता शादी में क्या वचन देते हैं एकदूसरे को पर आज मैं इस अग्नी को साक्षी मानकर तुम्हे कुछ वचन देना चाहती हूँ।
हमने दिये का एक फेरा लीया और ओ बोली,"मैं वचन देती हूँ की मुझे तुमपर जितना trust, यकीन आज हैं। उतना ही आगे भी रखूनगी।"
फिर दुसरा..
मैनें कहाँ," कभी भी हमारे रिश्ते मैं कोई छोटा या बडा नहीं होगा।"
तिसरा फेरा...
उसने कहाँ," कभी भी इस रिश्ते के लिये हम ने क्या खोया ये एकदुसरे से नहीं कहेंगे।"
चौथा फेरा....
मैं,"मैं कितना भी परेशान रहूँ, गुस्से में रहूँ। कभी भी तुम्हारे आत्मसम्मान को ठेस पोहचे ऐसा कुछ नहीं बोलूंगा।"
पाचवा फेरा...
वो,"चाहे अच्छा वक्त रहे या बुरा मैं हमेशा तुम्हारे साथ खडी रहूंगी।'
छटवा फेरा...
मैं," life में तुम्हारे हर फैसले से मैं सहमत रहूँ ये नहीं हो सकता।लेकिन तुम्हारे हर फैसले मैं तुम्हारे साथ खडा रहूँगा।"
सातवा फेरा...
वो,"आज से मैं तुम्हे अपने तन मन से सबकुछ मानती हूँ।" और इस बार जब गले मिली तो उसके आँखो में आँसू थे।
        कही बार ऐसा होता हैं की हम कुछ फैसले लेने में जिंदगी लगा देते हैं, फिर भी वो फैसले गलत हो जाते हैं। और कुछ फैसले पलक झपके इससे पहले हो जाते हैं जो फैसले कभी गलत नहीं होते।

-बुद्धभूषण जाधव

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