ऐतबार..

उसके पायल की चमचम मुझे परेशान कर रही थी। मैंने बिना कुछ कहे अपनी आँखे खोली और उसकी तरफ देखने लगा। होना तो गुस्सा था, लेकिन पता नहीं क्यू उसको देखकर मैं अपना गुस्सा भूल उसे बडे प्यार से देख रहा था। मेरे कमरे में (या फिर युं कहो हमारे कमरे में) उसका इतना घुल जाना मुझे अच्छा लग रहाँ था। कमरे की हर चीज भी उसे अपना चुकी थी। मैं उसे बस देख रहा था। उसके बदन को छुपाने का काम मेरा सफेद शर्ट कर रहा था। उस सफेद शर्ट पर उसके लिपस्टिक का लाल निशाण ही काफी था। मेरा ध्यान भटकाने के लिये।
मैंने बिस्तर से ही पुरे कमरे में नजर गुमाई। बेड के बाजू में जमीन पर पडी उसकी चुणरी उठाई और पिछे से जाकर उसके सिर पर डाल दी। वो बिना चौके बोली,"रायटर साब.! हो गयी सुबह?" मैंने उसके पिठ को चुमते हुये बस,'हम्म.!' कहाँ।
वो मेरे तरफ मुडी और मेरे नाक पर अपनी नाक से छुकर बोलती हैं,"आपको पता है.! आप सोते हुये किसी बच्चे से मासुम लगते हो।"
मैं,"और जागते हुये?"
वो,"एकदम शैतान.!"
मैं," अच्छा.!"
वो गले लग गयी,"कल आपका मेरे पास आना। फिर मेरे माथे पर अपने लबो से छुना मुझे अच्छा लग रहा था।आपका आगे बढणे से पहले इशारो से पुछना,'क्या तुम तयार हो?मुझपर यकीन करणें के लिये।' फिर आपके बाहों में रात भर बिस्तर पर बेपर्दा होकर सोई थी। आपकी धडकनो को सूनकर पुरी रात खुद को महफ़ुज पा रही थी।आजसे पहले कभी कहाँ नहीं या फिर कभी महसूस नहीं किया था। प्यार करना एक बाद हैं। और ऐतबार करना एक बात हैं। और मैं पुरे दुनिया को बताना चाहती हूँ की मुझे आपसे ऐतबार हैं।बस चाहती हूँ पुरी जिंदगी आपके साथ हूँ ही आपके बाहों में सिमटकर कट जाये।
मैं बस सामने रखे बडे शीशे में उसे देख रहा था। फिर उसके माथे पर अपने लबो को रख दिया। बाकी की बातें हमारी आँखो ने बया कर दी एकदुसरे के सामने।

-बुद्धभूषण जाधव

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